बरही थाना: क्षेत्र में अवैध बालू खनन और परिवहन पर सरकारी प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से तस्करी का खेल जारी है। हालात ऐसे हैं कि तस्करों और पुलिस के बीच चोर-सिपाही का खेल चलता दिख रहा है। सुबह होते ही हजारीबाग रोड, धनबाद मार्ग, करियातपुर, लखना, दुलमाहा, बरसोत, दूधपनिया और श्रीनगर रोड पर दर्जनों ट्रैक्टर तेज रफ्तार में दौड़ते नजर आते हैं। इनकी आवाजें ग्रामीण इलाकों की सुबह की खामोशी को चीरती हैं, जैसे इन्हें कानून का कोई डर ही नहीं हो। राज्य सरकार द्वारा अवैध बालू खनन पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन ट्रैक्टरों की “थाने में इंट्री” होती है, उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं रहता। वहीं अन्य ट्रैक्टर चालक पुलिस से बचने के लिए लुकाछिपी का खेल खेलते हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि ट्रैक्टर पकड़ लिए जाते हैं तो मोटी रकम लेकर छोड़ दिया जाता है। हाल ही में शादी मोहल्ला क्षेत्र में जब चार ट्रैक्टरों को पकड़ने की कोशिश की गई, तो चालक डर के मारे बेकाबू होकर ट्रैक्टर भगाने लगे, जिससे सड़क किनारे ठेले और राहगीर बाल-बाल बचे। इधर पूजा के मौके पर बालू लोड ट्रैक्टर की रफ्तार काम नहीं हो रही है,जिससे भीड़ भाड़ क्षेत्र में दुर्घटना की आशंका भी रहती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा अवैध कारोबार पुलिस और बालू माफियाओं की मिलीभगत से चल रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने स्पष्ट रूप से रोक लगाई है, तो फिर ये तस्करी इतनी बेखौफ कैसे हो रही है? प्रशासनिक निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच आम जनता की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर चिंता गहराती जा रही है।
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